जब हम एक लोकतंत्र की बात करते हैं तब इस व्यवस्था में निर्णय, कार्य, समझोते एक सहयोगात्मक भावना से होने चाहिये ना कि एक व्यक्ति विशेष के तानाशाही निर्णय से। शायद यही कारण है ...
एक बेहतर नज़रिये के साथ..... सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक लेख से परिपूर्ण।।