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करणी सेना और सांप्रदायिक आतंकवाद

कहने के लिए तो देश में लोकतंत्र और संविधान के निर्देशानुसार शासन व्यवस्था चलाई जा रही है। परंतु समाज में व्याप्त कुछ ऐसे सांप्रदायिक तत्व अपना मुंह ऊपर उठाए खड़े रहते है...

क्या आपका आधार सुरक्षित है?

आज से कोई 7 साल पहले जब 2010 में आधार कार्ड बनने प्रारंभ हुए तब बड़ी उत्सुकता से लोगों ने अपनी भागीदारी सुनिश्चित कराई। तब शायद किसी के मस्तिष्क में यह प्रश्न उठा हो कि उंगलियों ...

गंगा सफाई और नई परियोजनाएं

नव वर्ष 2018 के शुरुआत में जब ठंड अपने चरम बिंदु की ओर अग्रसर है तो वहीं गंगा जैसी तमाम नदियां अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही हैं। अमूमन दिसंबर-जनवरी के समय गंगा वाराणसी में संतोषजनक जल स्तर के साथ बहती है । लोग नए साल का शुभारंभ गंगा में डुबकी लगाकर करते हैं परंतु साल 2018 के आगमन में ही वाराणसी के घाट जल से दूर हो गए हैं। वाराणसी में गंगा, घाट से करीब 30 फिट दूर बह रही है। जिन नदियों के किनारे सिंधु से लेकर मिस्र जैसी दुनिया की बड़ी-बड़ी सभ्यताएं पली-बढ़ी उन्हीं जीवन रूपी नदियों का लोग ऐसा हाल कर देंगे यह विचलित कर देता है । खासतौर पर तब और ज्यादा जब गंगा जैसी नदियों का , जिनको भारत के बुद्धजीवियों ने आस्था के साथ जोड़ा था। उन्होंने शायद यह नहीं सोचा होगा की आस्था के नए रुप भी आने वाली पीढ़ी निकाल लेगी। बहरहाल जो भी हो हालात अत्यंत दुश्वारियों से सुशोभित हो चुके हैं।                      90 के दशक में जब गंगा की हालत अत्यंत बुरी होने लगी तब सरकार का ध्यान इस ओर गया। सन 1986 में जब ...

2G घोटाला औए सीबीआई

समय के साथ परिवर्तन सकारात्मक दिशा में होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। 7 साल में हमारे देश के अंदर संचार क्षेत्र में एक क्रांति देखने को मिली हम 2 जी से 4जी चलाकर आनंद लेने लगे परं...

पत्थरबाज और कश्मीर

स्वर्ग के नाम से मशहूर कश्मीर वर्तमान में पत्थर फेंकने वाले लोगों से गुलजार नजर आता है। स्वतंत्रता के पश्चात वर्तमान तक कश्मीर में कभी भी स्थाई शांति देखने को नहीं मिली ।  कुछ समय शान्ति रहने के पश्चात घाटी ओखी  चक्रवात की तरह ऊफान मारने लगती है। अलगाववादी पुनः सक्रिय हो जाते हैं तथा नौजवानों , बच्चों से लेकर महिलाएं पत्थरबाजों की टोली में शामिल हो जाती हैं। इन सब घटनाओं के पीछे सभी के अपने-अपने दृष्टिकोण हो सकते हैं परंतु यह सत्य है कि सृष्टि का प्रत्येक मानव अपने जीवन में सुख शांति चाहता है, फिर ये लोग अपनी जान हथेली पर डालकर क्यों पत्थर फेंकते हैं ,सोचने पर मजबूर कर देता है।।                                साल 2011 में भारत सरकार ने कश्मीरी युवकों को मुख्यधारा में जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री विशेष छात्रवृत्ति योजना चालू की थी। इस छात्रवृत्ति योजना में 5000 कश्मीरी युवकों को  प्रत्येक वर्ष देश के अन्य हिस्सों में उच्च श...

लोक लुभावन और लोकतंत्र

गांधीजी और मैकियावेली ने मनुष्य के प्रति जो अपनी विचारधारा बनाई वह समुद्र के दो किनारों के जैसे थी। जहां गांधी जी मनुष्य को जन्म के आधार पर एक दयालू, ईमानदार और परोपकारी प्राणी मानते हैं वहीं मैकियावेली मनुष्य को उसके कार्यों के आधार पर स्वार्थी, क्रूर बताने का प्रयास करता है। हालांकि मैकियावेली की यह बात गलत ही साबित होती है कि मनुष्य हमेशा ही क्रूर होता है क्योंकि ऐसे तमाम लोग हुए जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन सामाजिक कार्यों, मानवता के लिए त्याग दिया चाहे वह नेल्सन मंडेला हों या महात्मा गांधी ।                                 वर्तमान समय में विश्व में लगभग सभी देश लोकतांत्रिक व्यवस्था को अपना चुके हैं ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि लोगों के अधिकार और मानवता की बात हो परंतु परमाणु हथियार के युग में राष्ट्र हित और अपना हित अत्यंत ही महत्वपूर्ण हो चुका है। आजकल लोकलुभावन जो कि अंग्रेजी के पॉपुलिस्म शब्द से निकल के आया है लोकतंत्र के ...

आय असमानता

मनुष्य विवेकशील प्राणी होने के नाते निरंतर अपने विकास की ओर अग्रसर रहता है। और शायद यही कारण है कि मनुष्य निरंतर दूसरों से बेहतर करने का प्रयास करता रहता है। यद्यपि यह एक स...